Negative Attitude

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Tuesday, November 10, 2015

बिहार चुनाव 2015- किये हुए कार्यो के प्रत्यायक की जीत

जीत की अनुभुति के लिए किसी प्रकार का नारा या स्लोगन की आवश्यकता नहीं होती है, ये तो एक ऐसा सुखद अहसास है जिसमे जीवन की तीक्ष्ण से तीक्ष्ण कड़वाहट भी निष्क्रिय हो जाती है. बिहार चुनाव २०१५ कोई ऐसी घटना नहीं थी जिससे ये समझा जा सके की यह तो महज लोकतंत्र  की व्यवहारिकता है जो हर पांच वर्ष में दोहराया जाता है! यह चुनाव सिर्फ दो ही समूहों में बटा था एक समूह जो नए वादों के जरिये जनता का समर्थन चाहते थे और दुसरा समूह अपने किये हुए वादों को पुरा करने के प्रत्यायक के साथ जनता का समर्थन मांग रहे थे. एक तरफ राजनीतिज्ञ अपनी चिरपरिचित चुनावी शैली के अनुसार यानी तुच्छ जुमलों,अपने प्रतिद्वंदियों को निचा दिखाना,नफ़रत एवं तिरस्कार को तसदीक़ करना आदि के सहारे जनता को अव्यवस्थित कर उनका वोट हासिल करने का प्रयास कर रहे थे तो वही दुसरी तरफ जनता इन तमाम घटनाक्रमों का साक्षी बन उनके संकेतो का मुल्यांकन कर रही थीं की किसको सत्ता सौपना है!

२०१४ लोकसभा चुनाव में किसी राजनैतिक विचारधारा की नहीं वल्कि चमत्कारी लोकलुभावन वादो की जीत हुई थी और वह भी असाधारण एवं ऐतिहासिक! और इस असाधारण एवं ऐतिहासिक विजय के पास ऐसी किसी भी प्रकार की प्रत्यायक नहीं थी जिसके अनुसार बिहार चुनाव २०१५ में जनता को समर्थन के लिए  मजबूर कर सके! विजय या पराजय की वजहों पर मीडिया या चुनावी विश्लेषक चाहे जितना भी मंथन करे,कितना भी गणित लगा ले परन्तु इस बार की बिहार के चुनावी बाजार समिति में लोगो ने लोकलुभावन वादों के जगह पे पुरे हुए वादों को जारी रखने के संकल्प और निश्चय को ख़रीदा है! २०१४ लोकसभा में परिवर्तन,विकास,सबका साथ और सबका विकास जैसे दिव्य विचारो ने पुरे हिंदुस्तान का दिल जीत लिया था और इसके लिए सत्तासीन पार्टी को किसी भी प्रकार के चुनावी गणित के आगे नतमस्तक नहीं होना पड़ा था. विचार और वादे ऐसे थे जिसने लोगो को इससे जुड़ने पर वाध्य कर दिया था लेकिन विजय ने जीत के कारकों को अपनी स्मृति से इस क़दर दरकिनार किया की मानों जीत ही उनके राजनैतिक जीवन की स्वाभाविक पारितोषिक है जो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो प्राप्त होती ही रहेगी!

इस बार बिहार के मतदाता ने राजनीतिज्ञों के द्वारा प्रसारित प्रत्येक वक्तव्यों का गहन मूल्यांकन कर मतदान किया है और राजनीतिज्ञों के लिए जनता के तरफ ये एक ज़ोरदार सन्देश है की आप जो वादे चुनाव में करते है उन्हें पुरा करे और उसके प्रत्यायक के साथ यह भी स्पष्ट करे की भविष्य में आप क्या करेंगे तभी हम आपके गणित के भागीदार बनेंगे…बिहार के मतदाताओं ने समर्थन के इस मापदंड को बिलकुल स्पष्ट रखा था जो चुनाव परिणाम में महागठबंधन के विशेष योग्यता के साथ बहुमत के साथ स्पष्ट तौर पर दिखाई भी देता है.…और 2015 चुनाव में बिहार की जनता का इस परिपक्व सोच के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा होनी चाहिए।

श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में नयी ऊर्जा के साथ नयी संघीकरण वाली सरकार बनने जा रही है और उनके और उनके साथियो के वक्तव्यों से साफ़ पता चलता है की वे बिहार के विकास को जारी रखने के उनके संकल्प और निश्चय के प्रति संवेदनशील है और जनता के उम्मीदों पर वह इस बार भी खरा उतरेंगे!

जीत या हार किसी भी प्रतियोगिता का अभिन्न अंग है.कहते है की किसी भी प्रकार की जीत में कई हीरो होते है लेकिन हार या पराजय का अगर तटस्थता एवं ईमानदारी के साथ सामना किया जाए तो यह भविष्य के कई हीरो के जननी के रूप में उभरती है! और इसीलिए जीत का जश्न मानाने से ज्यादा जरुरी है उसे विनम्रता के साथ स्वीकार करना और अपने कर्तव्यो का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना! 


शुभ दीपावली!

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